
नगर निगम की छवि धूमिल करने की कोशिश, भ्रामक खबर पर ‘अमर उजाला’ को नोटिस
देहरादून। नगर निगम देहरादून के वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल ने समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित एक खबर को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। निगम प्रशासन का कहना है कि यह खबर बिना तथ्यों को जांचे, केवल नगर निगम की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। इस संबंध में वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी द्वारा समाचार पत्र के संपादक को एक आधिकारिक खंडन पत्र भेजा गया है।
क्या था मामला?
’अमर उजाला’ समाचार पत्र में दिनांक 21.05.2026 को श्री संजय चौहान के नाम से एक खबर प्रकाशित हुई थी, जिसका शीर्षक था— “एसी में जिम्मेदार, बेजुबानों के लिए कूलर तक नहीं”। इस खबर में आरोप लगाया गया था कि कांजीहाउस (पशु आश्रय गृह) में बेजुबान जानवरों के लिए गर्मी से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
नगर निगम ने क्या दिया स्पष्टीकरण?
वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल ने पत्र के माध्यम से इन आरोपों का खंडन करते हुए कांजीहाउस की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है:
- पुख्ता इंतजाम: कांजीहाउस में निराश्रित गोवंश के लिए पर्याप्त छाया, स्वच्छ पेयजल, हरा चारा और भूसे की लगातार व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही कमजोर और बीमार पशुओं के लिए अलग से कैल्शियम, मिनरल मिक्सचर और पाचक (डाइजेस्टिव सप्लीमेंट्स) दिए जा रहे हैं।
- नेचुरल वेंटिलेशन: पशु शेड की ऊंचाई काफी ज्यादा है, जिससे शेड के नीचे गर्मी का असर बेहद कम होता है। इसके अलावा, शेड चारों तरफ से खुला होने के कारण वहां क्रॉस वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) की पर्याप्त सुविधा है और वहां पर्याप्त मात्रा में पंखे भी चालू हालत में लगे हुए हैं।
- अधिकारियों के लिए भी कूलर-एसी नहीं: निगम ने साफ किया कि भ्रामक खबर में ‘एसी में जिम्मेदार’ होने की बात कही गई है, जबकि सच्चाई यह है कि कांजीहाउस में तैनात किसी भी पशुचिकित्सा अधिकारी या कर्मचारी के लिए किसी भी प्रकार के कूलर या एसी की व्यवस्था नहीं है।
- निरीक्षण पर उठाए सवाल: निगम ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अमर उजाला के प्रतिनिधि श्री संजय चौहान ने जब कांजीहाउस का मौका मुआयना किया, तो उन्हें अत्यधिक ऊंचाई वाले शेड दिखाई नहीं दिए, जिसके कारण उन्होंने कूलर की आवश्यकता का भ्रामक दावा कर दिया।
पहले भी छपी थी भ्रामक खबर
नगर निगम ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि इससे पूर्व भी इसी समाचार पत्र में पालतू कुत्तों को छोड़ने पर जुर्माने को लेकर एक गलत खबर छापी गई थी। उस खबर में जुर्माना 3,000 रुपये और एफआईआर की बात कही गई थी, जबकि वास्तविक जुर्माना राशि 20,000 रुपये थी। उस समय भी कार्यालय द्वारा खंडन पत्र भेजा गया था, लेकिन समाचार पत्र द्वारा कोई संशोधन प्रकाशित नहीं किया गया।
मेयर और नगर आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट
इस गंभीर मामले को देखते हुए वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी ने इस पत्र की प्रतिलिपि माननीय महापौर (मेयर) और नगर आयुक्त, नगर निगम देहरादून को भी सादर सूचनार्थ और आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की है, ताकि लगातार भ्रामक जानकारियां फैलाने वाले तत्वों पर नियमानुसार नजर रखी जा सके। नगर निगम ने अमर उजाला के संपादक से इस मामले में अपना पक्ष निगम के समक्ष रखने का अनुरोध किया है।

