देहरादून। उत्तराखंड सरकार में दायित्वधारियों की सूची जारी होने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में सरकार ने विभिन्न निगमों और आयोगों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपकर राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन साधने का प्रयास किया है।
इस बार की सूची में सबसे अधिक चर्चा गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को लेकर हो रही है। एक ओर राज्य सरकार जीएमवीएन और केएमवीएन के विलय की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अकेले जीएमवीएन में तीन गैर सरकारी निदेशकों की नियुक्ति की गई है। सरकार ने विशाल गुप्ता, ऋतु मित्रा और छात्र राजनीति से जुड़े पारस गोयल को गैर सरकारी निदेशक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निगमों के विलय की चर्चाओं के बीच किसी एक निगम में एक साथ तीन गैर सरकारी निदेशकों की नियुक्ति का मामला अपने आप में विशेष माना जा रहा है। इसे संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं चंपावत के मनोज कालाकोटी को अनुसूचित जाति आयोग में उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार द्वारा दायित्वधारियों की नई सूची जारी किए जाने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ और नामों की घोषणा भी संभव है।

