यूनिफॉर्म सिविल कोड में ये है प्रावधान

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देहरादून उत्तराखंड विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024’ विधेयक पेश कर दिया गया। इस विधेयक का मकसद एक ऐसा कानून बनाना है, जो शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी धर्मों पर लागू हो।
उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया गया। इसे जल्द ही सदन में मंजूरी मिल सकती है। राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा। इस तरह से गोवा के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा।

बता दें कि 4 फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट से समान नागरिक संहिता विधेयक को मंजूरी मिली थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधेयक को विधानसभा में पेश करते हुए कहा कि राज्य में सबको समान अधिकार प्रदान करने हेतु हम सदैव संकल्पित हैं।

उत्तराखंड में पेश किया गया विधेयक क्या है?
मंगलवार को राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया। इसे ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024’ नाम दिया गया है। 182 पन्नों के इस कानूनी मसौदे में कई धाराएं और उप-धाराएं हैं। इसमें उत्तराधिकार, विवाह, विवाह-विच्छेदन और लिव इन रिलेशनशिप के बारे में नियम-कानूनों का उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बुराइयों के खात्मे के लिए उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए देश में सबसे मुफीद राज्य है। इस बिल का मकसद एक ऐसा कानून बनाना है, जो शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी धर्मों पर लागू हो।

समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024′ नाम दिया गया है। 182 पन्नों के इस कानूनी मसौदे में कई धाराएं और उप-धाराएं हैं। इसमें उत्तराधिकार, विवाह, विवाह-विच्छेदन और लिव इन रिलेशनशिप के बारे में नियम-कानूनों का उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बुराइयों के खात्मे के लिए उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए देश में सबसे मुफीद राज्य है। इस बिल का मकसद एक ऐसा कानून बनाना है, जो शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी धर्मों पर लागू हो।
विवाह के बारे में क्या है?
विधेयक के भाग-1 में विवाह और विवाह विच्छेद का जिक्र है। वहीं भाग-2 में विवाह और विवाह विच्छेद पंजीकरण को जगह दी गई है। इसके लिए अहम प्रावधान हैं:
समान नागरिक संहिता सभी के लिए विवाह की न्यूनतम आयु को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है, जिसमें युवक की आयु 21 वर्ष और युवती की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
इस संहिता में पार्टीज टू मैरेज यानी किन-किन के मध्य विवाह हो सकता है, इसे स्पष्ट रूप से बताया गया है। विवाह एक पुरुष और एक महिला के बीच ही संपन्न हो सकता है।
इस संहिता में पति अथवा पत्नी के जीवित होने की स्थिति में दूसरे विवाह को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अब तलाक के बाद दोबारा उसी पुरुष से या अन्य पुरुष से विवाह करने के लिए महिला को किसी प्रकार की शतों में नहीं बांधा जा सकता। यदि ऐसा कोई विषय संज्ञान में आता है, तो इसके लिए तीन वर्ष की कैद अथवा एक लाख रुपए जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान किया गया है।
विवाह के उपरांत वैवाहिक दंपतियों में से कोई भी यदि बिना दूसरे की सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को तलाक लेने और गुजारा भत्ता क्लेम करने का पूरा अधिकार होगा।
विवाह का पंजीकरण अब अनिवार्य रूप से कराना होगा। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम तथा जिला और राज्य स्तर पर इनका पंजीकरण कराना अब संभव होगा। प्रक्रिया को और ससत बनाने के लिए एक वेब पोर्टल भी होगा जिस पर जाकर पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
एक महिला और एक पुरुष के मध्य होने वाले विवाह के धार्मिक/सामाजिक विधि-विधानों को इस संहिता में छेड़ा नहीं गया है। अर्थात वे लोग जिस पद्धति से भी विवाह करते चले आ रहे हैं, जैसे कि सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, होली यूनियन या आनंद कारुज अथवा इस प्रकार की अन्य परंपराएं, वे लोग उन्हीं प्रचलित परंपराओं के आधार पर विवाह संपन्न कर सकेंगे।
विवाह विच्छेदन को लेकर क्या कहा गया है?
विधानसभा में सरकार ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू न होने का सबसे ज्यादा नुकसान अभी तक मातृ शक्ति को उठाना पड़ा। पुरुष लचर कानून का लाभ उठाकर बहुविवाह, उत्ताक आदि करते रहे।
समान नागरिक संहिता लागू होने पर कोर्ट में लंबित पड़े मामलों का भी जल्द निपटारा हो सकेगा। समान नागरिक संहितासे मुस्लिम बहिनो की स्थिति बेहतर होगी। मुस्लिम महिलाओं को भी बच्चा गोद लेने का अधिकार मिल जाएगा।
देश में सभी धर्मों के अलग-अलग पर्सनल लॉ है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। लेकिन समान नागरिक संहिता में शामिल बिंदुओं से अतिरिक किसी भी धर्म को मान्यताओं से छेड़छाड़ नहीं की गई है।
कई सामाजिक बुराइयां धार्मिक रीति-रिवाजों की आड़ में पनपती हैं। इसमें गुलामी, देवदासी, दहेज, तीन तलाक, बाल विवाह या अन्य प्रथाएं शामिल हैं। समान नागरिक संहिता इन सभी सामाजिक बुराइयों के खात्मे की गारंटी देता है।

उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता में क्या?: गुलामी, दहेज से लेकर लिव-इन संबंध को लेकर उत्तराखंड विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024’ विधेयक पेश कर दिया गया। इस विधेयक का मकसद एक ऐसा कानून बनाना है, जो शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी धर्मों पर लागू हो।
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