नई आबकारी नीति को लेकर व्यापारी चिंतित, मुख्य सचिव से की ये मांग।

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देहरादून राज्य की नई आबकारी नीति को जहाँ राजस्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।वही राज्य के ठेकेदारों को इस नई पालिसी को लेकर कई आपत्ति वा चिंता भी है जिसे लेकर दुकानदारों ने मुख्य सचिव व आबकारी सचिव को ज्ञापन सौपा है। दुकानदारों की मुसीबत ये है कि मौजूदा समय मे ही उनका कोटा लंबित चल रहा है पैसे जमा किये जाने है वही दूसरी ओर नई नीति के तहत 15 फरवरी से शुरू होने जा रहे ठेकों के आवेदन की एक बड़ी समस्या व्यापारियों के सामने आ गई है लिहाज़ा पालिसी में कुछ बदलाव का अनुरोध भी व्यापारियों ने किया है।
प्रमुख मांगे जो कि ज्ञापन सौपा गया है।

1. महोदय कोरोना महामारी के कारण वर्तमान वर्ष में दुकानदार को बहुत अधिक आर्थिक नुकसान हुआ है, इसका मुख्य कारण लाकडाउन व पर्यटन, शादी, पार्टी या सामाजिक क्रियाकलाप न होना है। 2 उपरोक्त कारणवश सभी दुकानों का अधिभार 3 महीने का शेष रह गया है जिसका कारण वर्तमान दुकान अनुज्ञापियों को अधिभार उत्तराखंड सरकार को तो जमा करना है. फिन्तु माल की विकी न होने के कारण अनुज्ञापियो को नुकसान हो रहा है।
3. अधिभार छूटने का अन्य कारण कोरोना cess लगाना भी रहा है, जो कि पहले आवकारी नीति में नहीं था। और यह cess का आकलन अधिभार का लगभग 25% है. इस कम में 12 महीनों का अधिभार का पैसा 3 महीनों के cess के रूप में जमा करा दिया है, और यही 3 महीने का अधिभार लगभग छूट रहा है। जिसके कारण अनुज्ञापियों को वर्तमान में बहुत नुकसान हो रहा है।
4. आपके द्वारा सभी व्यवसाय को कोराना महामारी में किसी ना किसी रूप में मदद की गयी है परंतु व्यवसाय को आपके मदद से यचिंत रहना पड़ा है। इस वर्ष हमें बहुत अधिक आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। इसके अतिरिक्त जब हमारी पूंजी पूरी तरह से टूट चुकी है तो हम कैसे नए वर्ष के लिए टेंडर में जा सकते है जिससे विभाग के लिए 600 दुकानों का आवंटन करना मुश्किल होगा जो कि बहुत बढी राजस्व हानि का कारण बन सकता है।
5 महोदय  प्रतिवर्ष 5 से 10 % नये अनुज्ञापियो का पदार्पण होता है, तथा बाकि 90% पूराने अनुज्ञापियों द्वारा ही दुकानो का अनुज्ञापन किया जाता है वर्तमान में सभी अनुज्ञापी पूजी से पूरी तरह से टूट धुके है यहाँ तक कि सभी 90% अनुज्ञापी के पास नवीन वर्ष 2021-2022 की आबकारी नीति के अन्र्तगत e टेम्डर डालने हेतु राशि नहीं बची है जिससे विभाग के लिए सभी दुकानों का अनुज्ञापन असंभव होगा, एवं भविष्य में यह बहुत बढी राजस्व हानि का कारण बन सकता है।
उपाय
महोदय सरकार द्वारा कोरोना महामारी को तो पोसे तेसे अथक प्रयासो से रोक लिया गया किन्तु कोरोना महामारी के कारण जो आर्थिक महामारी आने जा रही है उसको राकने के लिए कुछ आमूल चूल परिवर्तन आवश्यक है जो कि हम समस्त देशी/विदेशी व्यसायियों द्वारा निम्न सन्दर्भित हा
6. महोदय विनम्र निवेदन है कि सभी दुकानों के लिए पूर्व अनुज्ञापियों को ही नवीनीकृत किया जाए बिना रेनूअल चार्ज के उन दुकानों का नवीनीकरण कर दिया जाए (पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तरह) ।
7. महोदय जो अनुज्ञापी 20-21 की दुकाने नवीनीकृत करा लेते हैं व वर्तमान 20-21 का अधिभार अवशेष रह जाता है व आगामी वर्ष 21-22 में जमा कर स्टाकामाल उठाने के लिए अधिकृत कर दिया जाए। (भारतीय बैंकों की मोरोटोरियम नीति की तर्ज पर) 8. जिन दुकानों का नवीनीकरण नहीं हो पाता है उन्हें आगामी 21-22 की आवकारी नीति के अन्तर्गत
e टेन्डर प्रकिया से आवंटित किया जाए।
उपरोक्त से विभाग को कोई आर्थिक हानि नहीं होगी अपितु शेष उठने वाले माल में अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, इंपोर्ट ड्यूटी, प्रतिफल और वैट व्यापार कर भी मिलेगा और राजस्व बढ़ोतरी होगी। यहाँ यह बताना आवश्यक होगा कि सभी मदों कि योग एक पेटी के अधिभार के लगभग बराबर होता है।
अतः महोदय से विनम्र निवेदन है कि सभी अनुज्ञापियों की मदद करें जिससे प्रदेश सरकार और अनुज्ञापियों दोनों को लाभ प्राप्त हो । हम सभी व्यवसायी आपके आभारी रहेंगे।
प्रार्थी
विदेशी/देशी मदिरा व्यवसायी