कहते हैं ना — “न समय से ज्यादा, न समय से कम…”
देहरादून के पूर्व जिलाधिकारी संविन बंसल शायद इस बात को भूल बैठे। DM पद से हटने के बावजूद सरकारी बंगले से मोह ऐसा कि कुर्सी चली गई, लेकिन बंगला नहीं छोड़ा गया। मगर देर रात किस्मत ने ऐसा तंज कसा कि मामला खुद चर्चा का विषय बन गया।
बीती रात एक प्रकरण को लेकर विशेष समुदाय से जुड़े लोगों की भारी भीड़ गुस्से में DM आवास का घेराव करने पहुंच गई। रात करीब 12 बजे तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। लेकिन कुछ देर बाद आंदोलनकारियों को पता चला कि जिस बंगले को वो मौजूदा जिलाधिकारी का आवास समझकर घेर रहे हैं, उसमें वर्तमान नहीं बल्कि पूर्व जिलाधिकारी संविन बंसल रह रहे हैं।
अब सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर पद छोड़ने के बाद भी सरकारी बंगले से ऐसा लगाव क्यों? क्योंकि कई बार कुर्सी जाने के बाद भी सिस्टम यही याद दिला देता है कि सरकारी आवास पद का होता है, व्यक्ति का नहीं।

