दिनेश आर्या की राज्यसभा उम्मीदवारी ने दिया सियासत में बड़ा संदेश
देहरादून। उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए भाजपा द्वारा वरिष्ठ दलित नेता दिनेश आर्या को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रदेश की सियासत में एक संदेश सबसे ज्यादा चर्चा में है—मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने लोगों का साथ नहीं छोड़ते।
दिनेश आर्या और मुख्यमंत्री धामी के पुराने राजनीतिक संबंध इस संदेश को और मजबूत करते हैं। धामी के पहले कार्यकाल में दिनेश आर्या को उनका जनसंपर्क अधिकारी बनाया गया था। लंबे समय से संगठन और विचार परिवार से जुड़े आर्या को अब राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को उनके राजनीतिक सफर में बड़ी जिम्मेदारी के साथ-साथ मुख्यमंत्री के भरोसे से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता और संगठन की राजनीति में समय के साथ समीकरण बदलते रहते हैं, लेकिन धामी की कार्यशैली में पुराने साथियों और भरोसेमंद लोगों को साथ लेकर चलने की छवि लगातार बनी हुई है। आर्या की राज्यसभा उम्मीदवारी को इसी भरोसे और साथ निभाने की राजनीति का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
इस फैसले से भाजपा के भीतर यह संदेश भी गया है कि मुख्यमंत्री के साथ लंबे समय से जुड़े और संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं की राजनीतिक उपयोगिता और भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। धामी के साथ काम कर चुके नेताओं के लिए यह एक तरह का भरोसे का संदेश भी माना जा रहा है।
इसी दिन बनबसा और खटीमा में मुख्यमंत्री की सक्रियता ने इस राजनीतिक संदेश को और व्यापक रूप दिया। बनबसा में पहली बार देहरादून से बाहर कैबिनेट बैठक और खटीमा में आदि रंगोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने यह दिखाया कि धामी सरकार का फोकस केवल सत्ता के केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों और स्थानीय जनता से सीधा जुड़ाव भी उनकी राजनीति का अहम हिस्सा है।
एक तरफ दिनेश आर्या की राज्यसभा उम्मीदवारी ने यह संदेश दिया कि धामी अपने पुराने साथियों और भरोसेमंद लोगों का साथ नहीं छोड़ते, तो दूसरी तरफ बनबसा-खटीमा में उनकी मौजूदगी ने जमीन पर उनके मजबूत जनसंपर्क को दिखाया।
यानी धामी की राजनीति का संदेश साफ दिखाई देता है—सत्ता में रहते हुए भी रिश्ते नहीं भूलना और साथ निभाने वालों का हाथ थामे रखना।
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