अपराधियों में नहीं, होटल-ढाबा संचालकों और कारोबारियों में मचा छोटे कप्तान का हाहाकार!
मुफ्तखोरी के फरमान से मातहत पुलिसकर्मी भी असहज, परिवार की जिम से लेकर रिश्तेदारों की होटलनवाजी तक का इंतजाम कराने के आरोप
देहरादून। कुमाऊं मंडल के एक जनपद में तैनात छोटे कप्तान इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चाओं में हैं। हैरानी की बात यह है कि साहब के खौफ से अपराधियों में नहीं, बल्कि होटल-ढाबा संचालकों, जिम संचालकों और सब्जी विक्रेताओं से लेकर दूसरे कारोबारियों में हाहाकार मचा हुआ है। चर्चाएं हैं कि साहब की कथित मुफ्तखोरी की आदत का अनुपालन कराने में अब मातहत पुलिसकर्मी भी असहज महसूस करने लगे हैं।
आरोप हैं कि साहब को अपने परिवार के लिए मुफ्त जिम की सुविधा से लेकर आस-पड़ोस और रिश्तेदारों तक की होटलनवाजी का इंतजाम चाहिए। इतना ही नहीं, खाने-पीने के सामान के पार्सल भी इतनी तेजी से मंगाए जा रहे हैं कि मानो ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के लिए भी यह किसी बड़ी चुनौती से कम न हो। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि साहब की फरमाइशें केवल अपने जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पड़ोसी जनपद से भी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इन कथित फरमाइशों को पूरा कराने की जिम्मेदारी मातहत पुलिसकर्मियों पर आ रही है। ऐसे में पुलिसकर्मी खुद को असहज और अपमानित महसूस कर रहे हैं। वर्दी पहनकर कानून व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों को यदि इस तरह की व्यवस्थाओं में लगाया जाए तो महकमे की छवि पर सवाल उठना लाजिमी है।
फिलहाल, इन चर्चाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह है कि जिन पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने की है, वे आखिर कब तक साहब की कथित व्यक्तिगत फरमाइशों का बोझ उठाते रहेंगे?

