न्याय यात्रा में ही कांग्रेस की गुटबाजी उजागर, सेलाकुई में नारेबाजी से गरमाया माहौल

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न्याय यात्रा में ही कांग्रेस की गुटबाजी उजागर, सेलाकुई में नारेबाजी से गरमाया माहौल
सहसपुर में नेताओं के समर्थकों के बीच वर्चस्व की होड़, जनता के मुद्दों से ज्यादा दिखी अपनी-अपनी नेतागीरी की चिंता
देहरादून/सेलाकुई। उत्तराखंड में भाजपा सरकार को घेरने और जनसमस्याओं को लेकर जनता के बीच पहुंचने के उद्देश्य से निकली कांग्रेस की ‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ के दौरान सेलाकुई में पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में यात्रा के पहुंचते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी को लेकर माहौल गरमा गया। जिस यात्रा के जरिए कांग्रेस को एकजुटता और जनता के बीच अपनी ताकत दिखानी थी, उसी में पार्टी के भीतर खींचतान के दृश्य सामने आने से संगठन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
यात्रा के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग नेताओं के समर्थन में नारेबाजी ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। सामने आई जानकारी के अनुसार, समर्थकों के बीच अपनी ताकत और वर्चस्व दिखाने की होड़ के चलते हंगामे जैसी स्थिति बनी। वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने भी नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ताओं को शांत रहने की हिदायत दी।
जनता को न्याय दिलाने निकली कांग्रेस, पहले अपने घर में एकजुटता की चुनौती
कांग्रेस की न्याय यात्रा का उद्देश्य अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरना है। लेकिन सेलाकुई में सामने आए घटनाक्रम ने पार्टी के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है। सवाल यह है कि जब पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक सार्वजनिक मंच पर एकजुटता नहीं दिखा पा रहे, तो कांग्रेस प्रदेश की जनता के सामने मजबूत विकल्प बनने का संदेश कैसे देगी?
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह यात्रा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में यात्रा के दौरान ही गुटबाजी का सामने आना संगठनात्मक तालमेल और स्थानीय नेतृत्व के बीच समन्वय पर सवाल खड़े करता है। सहसपुर जैसे विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की आंतरिक खींचतान का सार्वजनिक होना चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी चुनौती बन सकता है।
27 अक्टूबर के विधानसभा घेराव से पहले संगठन के सामने परीक्षा
कांग्रेस ने 22 से 25 अक्टूबर तक प्रदेश में न्याय यात्रा के कार्यक्रम तय किए हैं। इसके बाद 27 अक्टूबर को गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव की तैयारी है। ऐसे में पार्टी के सामने अब केवल सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने की चुनौती नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक मंच पर लाने की जिम्मेदारी भी है।
सेलाकुई का घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक संदेश की तरह है कि सरकार को घेरने से पहले संगठन के भीतर तालमेल मजबूत करना जरूरी है। यदि गुटबाजी इसी तरह सार्वजनिक होती रही, तो पार्टी की राजनीतिक मुहिम पर उसके अपने ही अंतर्विरोध भारी पड़ सकते हैं।