देहरादून कलेक्ट्रेट में अब बहुत कुछ बदलता नजर आएगा। शासन द्वारा जिलाधिकारी के तबादले के बाद रविवार को पूरे दिन कलेक्ट्रेट और संबंधित दफ्तरों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। कर्मचारियों से लेकर फरियादियों तक के बीच इस बात की चर्चा रही कि अब कलेक्ट्रेट का पुराना “भौकाल सिस्टम” खत्म होता दिखाई देगा।
चर्चाओं के अनुसार अब कलेक्ट्रेट परिसर में काले सफारी सूट पहनकर खुद को LIU और CPT से जुड़ा बताने वाले होमगार्ड नजर नहीं आएंगे, जिन पर अक्सर रौब झाड़ने और आम लोगों को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे। वहीं जिलाधिकारी की एस्कॉर्ट में चलने वाली सरकारी बुलेरो भी अब सड़कों पर हूटर बजाकर आम जनता को परेशान करती नहीं दिखेगी।
इसके अलावा जिलाधिकारी आवास से जुड़ी चर्चित जिमनी वाहन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि आपदा रेस्क्यू के नाम पर खरीदी गई यह गाड़ी अब वास्तविक आपदा कार्यों में इस्तेमाल की जा सकती है।
कलेक्ट्रेट में बाबुओं की गुटबाजी में प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर भी लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। माना जा रहा है कि नए प्रशासनिक बदलाव के बाद इस व्यवस्था में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। वहीं CPO जैसे महत्वपूर्ण पद पर अमीन की तैनाती को लेकर उठते रहे सवालों पर भी अब विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार तबादला आदेश जारी होने के बावजूद रविवार को चार्ज छोड़ने से पहले कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की गई। साथ ही कुछ “खास” कर्मचारियों को सुरक्षित और मनचाही पोस्टिंग दिए जाने की चर्चाएं भी दिनभर प्रशासनिक गलियारों में तैरती रहीं।
फिलहाल कलेक्ट्रेट में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नए प्रशासनिक नेतृत्व में व्यवस्था कितनी बदलती है और आम जनता को इसका कितना फायदा मिलता है।

