
देहरादून वैसे समझ तो आप गए ही होगें कि बात किन महोदय की हो रही है। इनके जलवा और हनक से तो सभी अच्छी तरह वाकिफ ही है।
गढवाल मंडल के एक जिले में कुछ घटनाओ ने सरकार तक को चिंतित कर दिया है पर साहब बेफ्रिक है या उन्हें खास रुचि नहीं है। यही वजह है कि दूसरे विभागों के अफसरों के 4 4 फोन काल्स रीसिव नही हुए न ही कॉल बैक हुए। चर्चायें तो यह भी है कि कानून व्यवस्था से जुडे अहम विभाग के एक वरिष्ठ अफसर का भी फोन नही उठा न कॉलबैक हुई मौजूदा दौर में इस मामले से बडा कोई मामला नही था कि जो फोन काल को इग्नोर कर दिया जाए। इतना ही नही शासन में एक अति वरिष्ठ अफसर की बैठक में साहब चुप चुप और खिंचे खिंचे ही रहे या तो साहब को जानकारी नही थी कि आखिर इतना बडा बवाल क्यों हुआ और लगाम कैसे लगे या फिर इस मामले में कोई कार्रवाई या रणनीति से सीधे उनकी इमेज बिल्डिंग नही हो रही होगी। बरहाल शासन से लेकर फोर्थ फ्लोर में सिर्फ साहब की चर्चा है कई जानकार कहते है कि ऐसा रवैय्या व्यवहार पहले कभी नही देखा गया ऐसी क्या मजबूरी है कि इन पर ही मेहरबानी की इमदाद है

