
देहरादून में हुए हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने फैसलों के जरिए न सिर्फ पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत दिखाई है, बल्कि विपक्ष को भी असहज कर दिया है।
माना जा रहा है कि इस विस्तार में धामी ने पूरी तरह अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत फैसले लिए, जिससे उनका कद और प्रभाव दोनों बढ़ा है। भाजपा खेमे में जहां इसे मजबूत नेतृत्व के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं कांग्रेस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
कैबिनेट में शामिल किए गए नामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। पार्टी इन नेताओं को “पूर्व कांग्रेसी” बताकर खुद को संतुलित दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे उसके भीतर की असहजता भी झलक रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की प्रतिक्रिया कांग्रेस के पुराने जख्मों को फिर से उभार रही है, खासकर उन नेताओं को लेकर जो पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
सोशल मीडिया पर कांग्रेस सरकार को घेरने में जुटी है, लेकिन इसके साथ ही उसे अपने ही अतीत और निर्णयों पर उठ रहे सवालों का सामना भी करना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में यह कहा जा रहा है कि धामी की रणनीति ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस सियासी दबाव से कैसे बाहर निकलती है और क्या वह कोई ठोस रणनीति बनाकर भाजपा को चुनौती दे पाती है। फिलहाल, कैबिनेट विस्तार के बाद उत्तराखंड की राजनीति में धामी का दबदबा साफ तौर पर नजर आ रहा है।

