हरिद्वार ध्वस्त कानून व्यवस्था सीएम साहब संज्ञान लीजिए

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उत्तराखंड पुलिस किसकी है और किसके लिए है?
हरिद्वार के बहादराबाद की घटना ने खड़े किए पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
हरिद्वार जनपद के बहादराबाद क्षेत्र में 22 तारीख की रात ट्रक चालक फिरोज़ के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने उत्तराखंड पुलिस की भूमिका, संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ मारपीट का नहीं, बल्कि कार्रवाई में देरी, विरोधाभासी बयान और जांच की दिशा को लेकर भी गंभीर है।
पहली शिकायत: पीड़ित का दावा
मंसूरपुर (संभल) निवासी 22 वर्षीय ट्रक चालक फिरोज़ 22 तारीख की रात अपना ट्रक बहादराबाद स्थित एक होटल के पास खड़ा करता है। वहां पहले से शराब पार्टी कर रहे कुछ युवक उसके पास आते हैं। फिरोज़ का आरोप है कि नाम पूछने के बाद जब उन्हें पता चला कि वह मुसलमान है, तो उसके साथ बेल्ट और डंडों से बेरहमी से मारपीट की गई।
पीड़ित का यह भी कहना है कि उसने 112 नंबर पर कॉल किया था। मेडिकल रिपोर्ट में उसके शरीर पर चोटों के निशान दर्ज बताए जा रहे हैं। उसकी तहरीर पर अंकुर चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई — लेकिन दो दिन बाद, 24 तारीख को।
यहां उठते हैं बड़े सवाल
क्या 112 पर कॉल के बाद पुलिस मौके पर तुरंत पहुंची थी?
112 कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल के CCTV फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
क्या घटना वाली रात (22 तारीख) को ही पीड़ित और आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया?
अगर घटना 22 की है, तो एफआईआर 24 को क्यों दर्ज हुई?
दूसरी शिकायत: आरोपियों का पक्ष
अंकुर चौहान और उसके साथियों का दावा है कि वे रात 12:10 बजे एक होटल में खाना खा रहे थे। तभी एक ट्रक चालक वहां वाहन खड़ा करता है। आरोप है कि उनके दो साथी पास की खाली जगह पर पेशाब कर रहे थे, जिस पर ट्रक चालक ने गाली-गलौज की, ट्रक चढ़ाने की कोशिश की और धारदार हथियार से हमला किया।
उनका दावा है कि दो युवक घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
यहां भी गंभीर प्रश्न
अगर फिरोज़ ट्रक चढ़ा रहा था और हथियार से हमला कर रहा था, तो वह खुद इतना घायल कैसे हो गया?
पुलिस उस समय मौके पर पहुंची या नहीं?
पुलिस का पक्ष और सवालों का टकराव
इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि जांच में अभी तक धर्म से जुड़ा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है और दोनों पक्षों से तहरीर लेकर जांच की जा रही है।
लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है —
जब जांच जारी है, तो पहले ही “क्लीन चिट” जैसे बयान क्यों?
अगर दोनों पक्षों की शिकायतें हैं, तो अब तक किस पर क्या कार्रवाई हुई?
मूल प्रश्न: पुलिस की प्राथमिकता क्या है?
यदि किसी के घर डकैती हो जाए, तो क्या पुलिस डकैतों से भी तहरीर लेती है?
या फिर पीड़ित की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करती है?
तो फिर इस मामले में पुलिस को यह तय करने में परेशानी क्यों हो रही है कि पीड़ित कौन है और आरोपी कौन?