भीमलाल आर्य की कांग्रेस में एंट्री से सियासत गरमाई, क्या पुराने विवाद भूल पाएंगे हरीश रावत?
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कभी समर्थन, फिर विरोध… अब वापसी पर उठे सवाल
उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर पुराने रिश्ते और नए समीकरण चर्चा में हैं। कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक भीमलाल आर्य को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उनके पुराने बयानों और विवादों को भुला पाएंगे कभी हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले आर्य ने समय-समय पर उनके खिलाफ तीखे बयान भी दिए थे, जिससे यह वापसी राजनीतिक रूप से दिलचस्प बन गई है।
दरअसल, वर्ष 2016 के उत्तराखंड राजनीतिक संकट 2016 के दौरान भीमलाल आर्य ने भाजपा से बगावत कर हरीश रावत सरकार का समर्थन किया था। उस समय उन्होंने अपनी विधायकी तक दांव पर लगाने की बात कही थी। हालांकि, बाद में हालात बदले और उन्होंने हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अगस्त 2016 में आर्य ने अपने क्षेत्र घनसाली की मांगों को लेकर हरीश रावत के आवास के बाहर धरना दिया और उन्हें “विकास का कातिल” तक कह दिया। यह बयान उस समय काफी चर्चाओं में रहा और दोनों नेताओं के रिश्तों में तल्खी साफ दिखी।
पूर्व में हरीश रावत ने दलबदल करने वाले नेताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए यहां तक कहा था कि वापसी करने वालों को माफी मांगनी चाहिए।
अब जब भीमलाल आर्य कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, तो सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी नेतृत्व और खासकर हरीश रावत उन्हें सहजता से स्वीकार कर पाएंगे या फिर पुराने विवाद फिर से सामने आएंगे।
फिलहाल, कांग्रेस में शामिल हुए कई नेताओं का भाजपा से पहले ही नाता टूट हुआ था।

