देहरादून। एक प्रमुख दैनिक अखबार के पूर्व संपादक, जो स्वयं को भावी सूचना आयुक्त के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं, द्वारा सूचना विभाग के कार्यों पर की जा रही टिप्पणी और तंज को लेकर पत्रकार जगत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वही महोदय, जो कुछ समय पहले तक विज्ञापन प्रस्ताव लेकर सूचना विभाग और मुख्यमंत्री के समक्ष याची की भूमिका में नजर आते थे, अब विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि संबंधित पूर्व संपादक की सोशल मीडिया पोस्ट से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। बिना पूर्ण तथ्यों और जानकारी के की गई टिप्पणियों से आमजन में पत्रकारों के प्रति भी अनावश्यक आक्रोश पनप रहा है, जो न केवल भ्रामक है बल्कि पत्रकारिता की साख को भी नुकसान पहुंचाने वाला है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकारों ने विधिक सलाह लेने के बाद निर्णय किया है कि आज पुलिस महकमे में उक्त पूर्व संपादक के खिलाफ तहरीर दी जाएगी और मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पत्रकारों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी व्यक्ति को भ्रम फैलाने और संस्थाओं की छवि धूमिल करने की छूट नहीं दी जा सकती।
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह की भ्रामक और तथ्यहीन टिप्पणियों पर रोक नहीं लगी तो इससे न केवल सूचना विभाग बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी। ऐसे में कानूनी कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचता है, ताकि समाज में सही संदेश जाए और भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

