
देहरादून/दिल्ली | उत्तराखंड कांग्रेस में ‘ज्वाइनिंग’ से पहले ही घमासान, रावत की नाराज़गी ने बढ़ाई टेंशन
उत्तराखंड कांग्रेस में दिल्ली में प्रस्तावित कुछ नेताओं की ज्वाइनिंग से पहले ही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के भीतर जारी खींचतान अब सार्वजनिक होती दिख रही है, जिससे बड़े सियासी भूचाल की अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता हरीश रावत की नाराज़गी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। उनकी 15 दिनों के ‘मौन’ की सोशल मीडिया पोस्ट को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विवादित एंट्री पर बवाल
बताया जा रहा है कि कांग्रेस में कुछ ऐसे नेताओं की एंट्री कराई जा रही है, जिन्हें विवादित माना जाता है—जैसे यशपाल राणा, लखन नेगी और राजकुमार ठुकराल।
पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि इन नेताओं की एक समान पहचान हरीश रावत का विरोध करना रही है।
गुटबाज़ी के आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह पर आरोप लग रहे हैं कि वे संगठन के बजाय अपने गुट को मजबूत करने में लगे हैं। कहा जा रहा है कि इन ज्वाइनिंग्स के जरिए पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश हो रही है, जिससे तिलक राज बेहड़ और हरीश रावत जैसे नेताओं को कमजोर किया जा सके।
दिल्ली बैठक से बढ़ा विवाद
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई बैठक में कुमारी शैलजा की मौजूदगी के बावजूद हरीश रावत के करीबी संजय नेगी की अनदेखी से मामला और बिगड़ गया। चर्चा है कि रावत ने शीर्ष नेतृत्व को राजनीति से संन्यास लेने या पार्टी छोड़ने तक का संकेत दे दिया है।
नई राह या बड़ा फैसला?
इसी बीच, उनके पुत्र आनंद रावत द्वारा ‘वैकल्पिक राजनीति’ की बात भी चर्चाओं में है। इससे यह अटकलें लग रही हैं कि हरीश रावत कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं—चाहे नई राजनीतिक राह चुनना हो या फिर किसी अन्य दल का रुख करना।
हाईकमान की बढ़ी चिंता
पार्टी की स्थिति को देखते हुए राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। गुटबाज़ी के बीच संगठन को एकजुट रखना बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।
भाजपा की आक्रामक तैयारी
जहां कांग्रेस अंदरूनी खींचतान में उलझी है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा 2027 चुनावों की तैयारी में जुट गई है। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय कर चुनावी जमीन मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम हो रहा है।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड कांग्रेस इस समय अपने ही अंतर्विरोधों से जूझ रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति पर पड़ सकता है।

