नार्थ ईस्ट छात्र एंजल चकमा की मौत: सरकार सख्त, शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर उठे गंभीर प्रश्न
देहरादून।
सेलाकुई क्षेत्र में नार्थ ईस्ट के छात्र एंजल चकमा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां एक ओर राज्य सरकार इस घटना को लेकर गंभीर और चिंतित नजर आ रही है,, देहरादून में रह रहे नार्थ ईस्ट के छात्र स्थानीय पुलिस के सहयोग से संतुष्ट दिख रहे हैं और उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया है।
छात्रों के बीच इस घटना को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी है। उनका कहना है कि निजी शिक्षण संस्थान नार्थ ईस्ट के राज्यों में जाकर बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के सपने दिखाकर छात्रों को देहरादून बुलाते हैं, लेकिन किसी घटना या संकट की स्थिति में वे पूरी तरह से उदासीन हो जाते हैं। छात्रों का आरोप है कि एंजल चकमा की मौत के बाद अब तक किसी भी कॉलेज या निजी शिक्षण संस्थान की ओर से न तो परिजनों से संपर्क किया गया और न ही कोई आधिकारिक बयान या सहायता सामने आई है।
इस बीच मृतक छात्र की मेडिकल रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की गंभीर बाहरी चोट के निशान नहीं पाए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि शराब सेवन की पुष्टि होने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम व अन्य रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं घटना का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने देहरादून पुलिस को निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं तथा कहा है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष पाए जाने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल यह मामला निजी शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही और बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस जांच के नतीजों पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

