अगस्त्यमुनि में देवरा यात्रा के दौरान हंगामा, गेट तोड़ा, 52 पर मुकदमा

ख़बर शेयर करें


रुद्रप्रयाग। महर्षि अगस्त्य की ऐतिहासिक देवरा यात्रा के दौरान गुरुवार को अगस्त्यमुनि में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गद्दीस्थल में प्रवेश के लिए क्रीड़ा मैदान का मुख्य गेट तोड़ दिया। गेट टूटने से करीब चार घंटे तक हंगामा चला और गौरीकुंड हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम लोगों और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।


दरअसल, लगभग 15 वर्षों बाद महर्षि अगस्त्य की डोली को अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल में प्रवेश करना था। बुधवार को मैदान के गेट को यात्रा मार्ग में बाधा बताकर श्रद्धालुओं ने विरोध किया था, जिसके चलते डोली को वापस मंदिर लौटाना पड़ा। उस दिन भी हाईवे पर करीब 10 किमी लंबा जाम लग गया था।


गुरुवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद डोली पुनः मंदिर से गद्दीस्थल के लिए निकली, लेकिन मैदान में बने गोल गेट को देखकर श्रद्धालु भड़क उठे और उस पर चढ़कर तोड़फोड़ शुरू कर दी। शाम करीब चार बजे गेट टूटने के बाद डोली ने मैदान में प्रवेश किया और भ्रमण के पश्चात गद्दीस्थल में विराजमान हुई।
घटना के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए 12 नामजद समेत 52 लोगों के खिलाफ लोक मार्ग बाधित करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जिला क्रीड़ा अधिकारी मनोज चौहान की शिकायत पर वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि यात्रा के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन ने पहले ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं और मंदिर समिति व संबंधित पक्षों से सहमति भी बनी थी। बावजूद इसके कुछ अराजक तत्वों ने धार्मिक परंपरा की आड़ में अव्यवस्था फैलाकर क्रीड़ा भवन का मुख्य द्वार तोड़ा और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म की आड़ में अराजकता, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे तत्वों पर गुंडा एक्ट सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, श्रद्धालुओं का कहना है कि मैदान की भूमि महर्षि अगस्त्य की है और प्रशासन को इस विषय में लचीलापन दिखाना चाहिए। हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था भंग करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम जारी रहेंगे।