शातिर अपराधी था आशीष डे हत्या के बाद अंडरग्राउंड रहकर काम कर रहा था आशीष डे

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जमशेदपुर में हत्या के बाद अंडरग्राउंड रहकर काम कर रहा था आशीष डे
7 वर्ष पहले

जमशेदपुर. गैंगस्टर अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु विक्रम शर्मा आज अपराध जगत की दुनिया से सदा सदा के लिए चल बसा है
शातिर विक्रम वेश और पहचान बदलकर उत्तराखंड के देहरादून में रह रहा था। पूर्व में जमशेदपुर पुलिस ने देहरादून में उसके किराये के फ्लैट से दबोच लिया था।

अपराध जगत में विक्रम दिमाग था तो अखिलेश उसकी ताकत। विक्रम शांत स्वभाव का है तो अखिलेश उग्र था। विक्रम प्लानर तो अखिलेश अंजाम देने वाला। विक्रम की सोच होती और अखिलेश उसे पूरा करता था। जानकारों के मुताबिक, जेलर हत्याकांड के बाद विक्रम अपने शिष्य को डॉन के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता था। उसने शहर में दहशत फैलाने के लिए बड़े कारोबारियों को निशाने पर लिया। 2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में अखिलेश के साथ उसके आपराधिक गुरु का नाम भी आया। इसके बाद पुलिस उसके पीछे पड़ गई।

पुलिस की बढ़ती दबिश के कारण वह भूमिगत हो गया और अखिलेश को गिरोह का चेहरा बनाया। गिरोह ने अखिलेश के नाम पर 2008 में सीरियल क्राइम किए। टाटा स्टील के अधिकारी जयराम सिंह, ट्रांसपोर्टर अशोक सिंह की हत्या सहित ताबड़ताेड़ कई अापराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। उनके विरोध में जो भी आया, गुरु-शिष्य ने रास्ते से साफ कर दिया। अपनों की जान लेने में भी वक्त नहीं गंवाया। परदे के पीछे रहकर उसने अखिलेश को डॉन के रूप में स्थापित किया। उसके खौफ से रंगदारी मिलने लगी। स्क्रैप कारोबार में सीधी दखल होने लगी। शिष्य के स्थापित होते ही विक्रम गायब हो गया। उसने देहरादून को ठिकाना बनाया। शहर के लोग उसे भूल ही गए थे, लेकिन दस साल के बाद पुलिस गिरफ्त में आ गया।

इधर, पांच साल तक सीबीआई में योगदान देने के बाद नवीन कुमार सिंह सोमवार को झारखंड में मुख्यालय आईजी बनाए गए। वे कोलकाता से रांची के लिए प्रस्थान करने वाले थे कि एसएसपी ने उन्हें सूचना दी कि विक्रम शर्मा पकड़ा गया है। नवीन कुमार सिंह ने शाबाशी दी, वेल डन। सिंह एसएसपी मैथ्यू के गुरु हैं। यह संयोग ही है कि सिंह ने अखिलेश को पकड़ा था और उनके शिष्य ने गैंगस्टर के गुरु विक्रम शर्मा को गिरफ्तार कराया।

विक्रम-अखिलेश से जुड़ी चर्चित घटनाएं

  • 2 नवंबर 2007- साकची आम बागान के पास श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या
  • 15 मार्च 2008 – साकची में रवि चौरसिया पर फायरिंग
  • 20 मार्च 2008- साकची में पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग
  • 16 मई 2008 – साकची में श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे के घर पर फायरिंग
  • 25 जुलाई- बिष्टुपुर में कांग्रेसी नेता नट्‌टू झा के कार्यालय पर गोली चली
  • 17 अगस्त 2008- बर्मामाइंस में अपराधी परमजीत सिंह के भाई सत्येंद्र सिंह की ससुराल में फायरिंग
  • 28 अगस्त 2008- साकची में ठेकेदार रंजीत सिंह पर फायरिंग
  • 17 सितंबर 2008- एमजीएम अस्पताल मोड़ पर बंदी परमजीत सिंह पर फायरिंग
  • 4 अक्टूबर 2008-बिष्टुपुर में बाग-ए-जमशेद के पास टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या
  • 2008- बिष्टुपुर में कीनन स्टेडियम के पास ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या

थ्री ‘पी’ को मैनेज करने में माहिर है विक्रम

मृदुभाषी, स्वभाव से शांत विक्रम शर्मा को व्यावहारिक माना जाता है। जिससे लाभ दिखा, वह उसे अपना बनाने की कोशिश करता। अपना सिक्का जमाने में उसने थ्री ‘पी’, यानी पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस को महत्वपूर्ण समझा। काबरा अपहरण कांड के बाद अखिलेश शहर का डाॅन बन चुका था। अखिलेश के आपराधिक साम्राज्य को चमकाने में विक्रम ने इसी रिश्ते का खूब उपयोग किया। 2004 से 2009 के बीच शहर में पदस्थापित थाना प्रभारी से डीएसपी स्तर के कई अफसर उसके प्रभाव में थे। इसका फायदा यह हुअा कि अखिलेश के गुर्गे आपराधिक वारदात करते और पुलिस उसके विरोधियों पर केस करती। तब ददई यादव व बड़ा निजाम का गिरोह उनका विरोध करते थे। नतीजा ददई दुबे और बड़ा निजाम मारे गए। उसकी विभिन्न दलों के नेताआें से भी अच्छे रिश्ते थे। झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन व आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो तक पहुंच थी। मीडिया से जुड़े कुछ लोगों से भी विक्रम के संबंध थे।

ट्रांसपोर्टर की हत्या के बाद उसकी पत्नी से भाई की शादी

संपत्ति के लिए विक्रम शर्मा ने अपनों की हत्या कराने में परहेज नहीं की। सोनारी आशियाना में रहनेवाले ट्रांसपोर्टर व होटल कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या का आरोप विक्रम शर्मा, अखिलेश सिंह, पिंकी शर्मा और हरीश अरोड़ा पर लगा था। पिंकी शर्मा अशोक की पत्नी थी। करोड़ों का कारोबारी अशोक का साकची में ट्रांसपोर्ट का कारोबार और आवास में होटल था। पुलिस के अनुसार, संपत्ति के लालच में अशोक की हत्या करा दी गई। हत्याकांड की जांच पुलिस और बाद में सीआईडी ने की। दोनों एंजेसियां साक्ष्य नहीं जुटा पाई और न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद विक्रम ने दिवंगत अशोक की पत्नी पिंकी शर्मा की शादी अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा से करा दी। हरीश अरोड़ा का साकची में अपना मार्केट कॉम्प्लेक्स है।

मार्शल आर्ट्स सिखाने के लिए चाइनीज फिल्मों का सहारा

शिष्य को शारीरिक रूप से फौलादी बनाने के लिए विक्रम शर्मा उसे मार्शल आर्ट्स से संबंधित चाइनीज फिल्म दिखाता था। ब्लैक बेल्टर विक्रम सिदगोड़ा के जंगल मैदान में बच्चों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देता था। अखिलेश भी उसके पास जाता था। अखिलेश के पिता चंद्रगुप्त सिंह झारखंड पुलिस एसोसिएशन के नेता थे और एक खास जाति के अधिकारियों के बीच गहरी पकड़ थी। चाइनीज फिल्म दिखाने के पीछे अखिलेश को हार्डकाेर बनाने की मंशा थी। मार्शल आर्ट वाली कई चाइनीज फिल्मों में शिष्य को गुरु पर मर-मिटते दिखाया गया है। कड़ी ट्रेनिंग ने किशोरावस्था में अखिलेश पर गहरी छाप छोड़ी और वह आपराधिक गुरु का प्रिय शिष्य बना। इस बीच विक्रम ने दिवगंत अशोक शर्मा के कारोबार पर दखल कर लिया था, जिसमें अखिलेश को जोड़ लिया था।