प्रशासन ने कराई बच्चों परिजनों की फजीहत स्कूल बंद के आदेश 7 बजे हुए जारी

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हरिद्वार में भारी बारिश के बीच देर से घोषित हुई छुट्टी, प्रशासन की लापरवाही से बच्चों और शिक्षकों की दुश्वारी

हरिद्वार। एक ओर जहां पावन नगरी हरिद्वार भारी बारिश के कारण जलमग्न है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन की लापरवाही ने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया। मानसून की मार और जलभराव के बीच जब बच्चे स्कूल के लिए निकल चुके थे, तब जाकर जिला अधिकारी मयूर दीक्षित को अवकाश घोषित करने की सुध आई।इतना ही नहीं आपदा के जिम्मेदारों ने तो ये आदेश 8 बजे ग्रुप में फॉरवर्ड कर इति श्री कर ली

सुबह-सुबह भारी बरसात के बीच बच्चे अपने स्कूलों के लिए निकल पड़े। कई बच्चे जलभराव से होकर भीगते हुए स्कूल पहुंचे, जहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि डीएम साहब ने छुट्टी घोषित कर दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दी थी, तो छुट्टी की घोषणा रात में या कम से कम सुबह जल्दी क्यों नहीं की गई?

शिक्षकों की भी फजीहत
केवल छात्र ही नहीं, बल्कि जिले के दूरदराज से आने वाले शिक्षक भी भारी बारिश और जलभराव से जूझते हुए किसी तरह अपने विद्यालयों तक पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। कुछ शिक्षकों ने तो यह भी कहा कि प्रशासन की इस देरी और असंवेदनशीलता ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर दिया।

अभिभावकों में रोष
अभिभावकों में भी प्रशासन को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन को छुट्टी घोषित करनी ही थी, तो समय पर करता ताकि छोटे-छोटे बच्चों को जलभराव और बारिश में परेशानी न उठानी पड़ती।

प्रशासन पर सवालों की बौछार
शहरवासियों का कहना है कि बार-बार होने वाली बारिश से उपजी समस्याओं के बावजूद हर बार प्रशासन देर से जागता है। न समय पर राहत कार्य, न स्कूल बंद करने की समय रहते घोषणा – यह दर्शाता है कि तैयारी केवल कागजों में है।