
तीन महीने में ही अवर अभियंता से सहायक अभियंता और फिर सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार, शहरी विकास विभाग पर उठे सवाल
देहरादून। उत्तराखंड का शहरी विकास विभाग एक बार फिर अधिकारियों की तैनाती को लेकर सुर्खियों में है। अभियंता रचित कुमार को 8 मई को रिक्त पद के सापेक्ष अवर अभियंता से सहायक अभियंता की जिम्मेदारी दी गई थी। अब करीब तीन महीने बाद 7 अगस्त को उन्हें नगर निगम के अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप दिया गया है। इतनी कम अवधि में मिली लगातार जिम्मेदारियों को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर तीन महीने के भीतर अभियंता रचित कुमार पर इतनी मेहरबानी की वजह क्या है? क्या विभाग में अधिशासी अभियंता स्तर की जिम्मेदारी संभालने के लिए दूसरे अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, या फिर इस तैनाती के पीछे कोई और वजह है? हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

तबादलों को लेकर पहले भी घिर चुका है विभाग
गौरतलब है कि बीते दिनों अधिशासी अधिकारियों (EO) के तबादलों को लेकर भी शहरी विकास विभाग और मंत्री को काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। विरोध बढ़ने के बाद सभी तबादलों को निरस्त करने के आदेश जारी करने पड़े थे। इस दौरान बेरोजगार संघ ने भी मोर्चा खोला था।
वहीं, हाथ में बैग लेकर तैनाती के लिए पहुंचने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर खासा चर्चित हुआ था। इस घटनाक्रम ने विभाग में तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए थे।
अब रचित कुमार को महज तीन महीने के भीतर सहायक अभियंता से आगे बढ़ाते हुए नगर निगम के अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने के बाद एक बार फिर विभागीय फैसले चर्चा में हैं। सवाल यही है कि क्या यह महज प्रशासनिक आवश्यकता है या इसके पीछे कोई और वजह है? विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी होगी, ताकि उठ रहे सवालों पर विराम लग सके।

