
देहरादून: दुष्कर्म समेत गंभीर धाराओं में आरोपी युवक बरी, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया फैसला
देहरादून की एफटीएससी (पॉक्सो) अदालत ने दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौन संबंध, ब्लैकमेल, मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी विकास कुमार शर्मा को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी/पॉक्सो) मंजू सिंह मुंडे ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक पुंडीर ने मामले में दमदार पैरवी की थी

मामला वर्ष 2019 में पटेलनगर थाने में दर्ज हुआ था। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 377, 384, 323, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने शादी का झांसा देकर महिला के साथ कई बार दुष्कर्म किया, ब्लैकमेल कर रुपये वसूले और धमकियां दीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पीड़िता ने न्यायालय में दिए अपने बयान में कई महत्वपूर्ण आरोपों का समर्थन नहीं किया। उसने स्वीकार किया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे तथा अदालत में मारपीट, जबरन दुष्कर्म, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और धमकी देने जैसे आरोपों से इनकार किया। मेडिकल साक्ष्यों से भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। इसके चलते आरोपी विकास कुमार शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया तथा उसके जमानती बंधपत्र भी निरस्त करने के आदेश दिए गए।

