
देहरादून/पिथौरागढ़ | बड़ी खबर
CJM कोर्ट का सख्त आदेश: पूर्व एसपी समेत पुलिसकर्मियों पर FIR के निर्देश
न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और कानून की सर्वोच्चता को एक बार फिर मजबूत करते हुए पिथौरागढ़ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (IPS) लोकेश्वर सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने संबंधित थानेदार को आदेश दिया है कि तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए, जबकि वर्तमान एसपी को इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग करने और प्रगति रिपोर्ट अदालत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश से पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि—
“किसी भी नागरिक को निर्वस्त्र कर मारपीट करना, गाली देना या अपमानित करना किसी भी लोक सेवक के वैधानिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हो सकता।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में धारा 197 CrPC के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा लागू नहीं होगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला शिकायतकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस लाइन के सीवरेज का गंदा पानी अपने बोरवेल में आने की शिकायत की थी।
6 फरवरी 2023 को जब वह एसपी कार्यालय शिकायत की स्थिति जानने पहुंचे, तो आरोप है कि वहां उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें निर्वस्त्र कर अपमानित किया गया, मोबाइल और पैसे छीन लिए गए और यहां तक कि एनकाउंटर की धमकी भी दी गई।
पुलिस ने नहीं दर्ज की FIR, कोर्ट पहुंचा पीड़ित
पीड़ित के अनुसार स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया, जहां से अब यह सख्त आदेश जारी हुआ है।
इन धाराओं में दर्ज होगा मुकदमा
अदालत ने आईपीएस लोकेश्वर सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ BNS की निम्न धाराओं में केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं—
धारा 323 – मारपीट
धारा 342 – अवैध रूप से बंधक बनाना
धारा 355 – अपमानित करना
धारा 504 – गाली-गलौज
धारा 506 – धमकी
धारा 392 – लूट
धारा 120B – आपराधिक साजिश
निष्पक्ष जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने वर्तमान एसपी पिथौरागढ़ को जांच की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण पहले ही इस मामले में पूर्व एसपी को दोषी ठहरा चुका है, जिससे अदालत के आदेश को और मजबूती मिली है।
जनता के लिए बड़ा संदेश
यह आदेश न सिर्फ पुलिस व्यवस्था के लिए एक सख्त संकेत है, बल्कि आम जनता के लिए भी यह भरोसा मजबूत करता है कि न्यायपालिका निष्पक्ष है और प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
(रिपोर्ट: देहरादून ब्यूरो)

