नगर निगम में निर्माण कार्यों की जांच में बड़ा खुलासा, 9 कार्य निरस्त, अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

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देहरादून।
नगर निगम सीमा अंतर्गत विभिन्न वार्डों में कराए जा रहे निर्माण एवं विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर हुई शिकायतों के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। नगर आयुक्त के आदेश पर गठित समिति ने कुल 261 कार्यों की जांच की, जिनमें से 252 कार्यों को सूची में सही पाया गया, जबकि 9 कार्यों को निरस्त करने की संस्तुति की गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 05 कार्य ऐसे पाए गए जो औचित्यपूर्ण नहीं थे, जबकि अन्य कुछ कार्यों में प्रक्रिया संबंधी खामियां सामने आईं। इनमें सीसी सड़क, नाली निर्माण, पुलिया निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो विभिन्न वार्डों में प्रस्तावित थे। समिति ने स्पष्ट किया कि कुछ कार्यों में सूची में दोहराव, औचित्य का अभाव और विभागीय प्रक्रिया का उल्लंघन पाया गया।
रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्रीय अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि देने और भविष्य में कार्यों को गंभीरता से करने की कड़ी चेतावनी जारी की गई है। वहीं, दो अभियंताओं का माह जनवरी 2026 का वेतन रोके जाने की भी संस्तुति की गई है। इसके अतिरिक्त, संबंधित पटल प्रभारी/लिपिक को तत्काल पटल से हटाते हुए उप नगर आयुक्त के साथ संबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर आयुक्त ने नगर निगम के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ करें। भविष्य में यदि इस प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
साथ ही, नगर निगम द्वारा विकास कार्यों के लिए नियमावली तैयार करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब प्रत्येक कार्य के लिए सहायक अभियंता/अवर अभियंता द्वारा प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा कि कार्य औचित्यपूर्ण है और इसके लिए किसी अन्य संस्था को अनुमति नहीं दी गई है।
इस कार्रवाई से नगर निगम में कार्य प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में विकास कार्यों में अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।