धर्मनगरी हरिद्वार जलभराव से बेहाल, प्रशासन की नींद नहीं टूटी
हरिद्वार। उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार इस मानसून सीजन में एक बार फिर जलभराव की भीषण समस्या से जूझ रही है। लगातार पांचवीं बार शहर में मूसलाधार बारिश के बाद हालात नाजुक हो गए हैं। देर रात से हो रही बारिश के चलते कई इलाकों में पानी भर गया, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
बच्चों से लेकर बुजुर्ग, व्यापारी, आम नागरिक और यहां तक कि तीर्थ यात्रा पर आए श्रद्धालु भी भारी जलभराव की चपेट में हैं। दुकानों और घरों में पानी घुस गया है, सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, और यातायात पूरी तरह चरमरा गया है। लोग घंटों तक पानी में फंसे रहे लेकिन प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर नहीं आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर बार आश्वासन देता है लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। लोगों का गुस्सा प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर फूट रहा है। नालों की समय रहते सफाई न होना, जल निकासी की उचित व्यवस्था न होना और आपात स्थिति से निपटने की रणनीति का अभाव—यह सब इस बदहाली के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
धार्मिक नगरी की गरिमा को ठेस
हरिद्वार न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि विश्वभर से श्रद्धालु यहां गंगा स्नान और दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन जिस तरह से शहर की हालत बार-बार जलभराव से बिगड़ रही है, उससे उसकी छवि भी प्रभावित हो रही है।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से इस लापरवाही के लिए जवाब मांगा है और चेताया है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बड़े आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
अब देखना होगा कि हरिद्वार प्रशासन कब नींद से जागता है और धर्मनगरी को जल संकट से राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।