स्टोन क्रेशर नीति पर उत्तराखंड सरकार का स्पष्टीकरण: स्वाभिमान मोर्चा के आरोपों को बताया भ्रामक और निराधार
देहरादून। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा द्वारा स्टोन क्रेशर और स्क्रीनिंग प्लांटों के नवीनीकरण को लेकर लगाए गए आरोपों पर राज्य सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मोर्चा द्वारा जारी प्रेस नोट को भ्रामक व तथ्यों से परे बताया है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि राज्य की स्टोन क्रेशर नीति पूरी तरह से पारदर्शी, कानूनी और राजस्व हित में है, जिसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है।
क्या है सरकार की दलील
सरकार ने बताया कि उत्तराखंड स्टोन क्रेशर, स्क्रीनिंग प्लांट आदि की अनुज्ञा नीति 2019 और 2020 में स्पष्ट रूप से 10 वर्षों की स्वीकृति तथा 10 वर्षों के नवीनीकरण का प्रावधान करती है। कोविड-19 महामारी और “Ease of Doing Business” की नीति के मद्देनजर इन इकाइयों के नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरलीकृत करते हुए Self Certification आधारित प्रणाली लागू की गई।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत एवं संचालित इकाइयों को केवल शपथ पत्र और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर नवीनीकरण की अनुमति दी गई, बशर्ते:
वे सभी नियमों का पालन करें,
पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करें,
कोई भी नया क्रेशर स्थापित नहीं किया गया हो।
राजस्व हानि नहीं, हुआ रेकॉर्ड कलेक्शन
राज्य सरकार ने कहा कि नवीनीकरण से संबंधित लगभग ₹40 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है और न कोई नया खनन पट्टा जारी किया गया, न ही कोई नया स्टोन क्रेशर स्वीकृत किया गया। इसके विपरीत, सरकार ने बताया कि:
वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹1040.57 करोड़
और वर्ष 2025-26 में अप्रैल से अगस्त तक ₹402.76 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ है।
वर्ष के अंत तक ये आंकड़ा ₹1200 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जो बताता है कि सरकार की नीतियां न केवल पारदर्शी हैं, बल्कि राजस्व वृद्धि में भी सहायक रही हैं।
तकनीकी निगरानी और डिजिटल पारदर्शिता
खनन विभाग में Mining Digital Transformation and Surveillance System (MDTSS) लागू किया गया है। इसके तहत:
45 आधुनिक माइन चेक गेट्स बनाए जा रहे हैं,
ANPR कैमरा, GPS ट्रैकिंग, RFID रीडर आदि लगाए जा रहे हैं,
ई-रॉयल्टी प्रपत्रों में सिक्योरिटी फीचर जोड़े गए हैं ताकि जालसाजी रोकी जा सके।
सार्वजनिक शिकायत निवारण की भी मजबूत व्यवस्था
जनता की शिकायतों के निवारण के लिए विभागीय Complaint Redressal Portal और जिला स्तर पर अवैध खनन निरोधक बल भी सक्रिय है।
सरकार का दो टूक जवाब:
“राजस्व में किसी भी प्रकार की हानि नहीं हुई है। स्वाभिमान मोर्चा द्वारा लगाए गए आरोप पूर्णतः मिथ्या एवं निराधार हैं।”
— प्रशासनिक वक्तव्य
निष्कर्ष:
राज्य सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी नई इकाई को स्वीकृति नहीं दी गई, केवल पुराने, अनुमोदित इकाइयों का ही नियमानुसार नवीनीकरण किया गया। सरकार की पारदर्शी नीतियों के कारण ही राज्य को इतिहास का सबसे अधिक खनन राजस्व प्राप्त हो रहा है।